दोस्तों नमस्कार, आज मैं आपको अपने जीवन में संघर्षों से कैसे लड़ना चाहिए, उसके बारे में चर्चा करूंगा
हर सफल इंसान की जिंदगी में बड़े संघर्ष की कहानी निश्चित रूप से होती है। जीवन एक सफर के समान होता है जिसका दौर कहीं जाकर खत्म होता है मानव जाति सभी जीवो में सर्वोत्तम जीव है जिसमें अपनी मानसिकता को विकसित करने की क्षमता होती है
अब ये हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम कैसी सोच रखें, कैसे वातावरण में रहे, कैसे लोगों की संगति करें किस प्रकार की विसंगतियों से दूर रहे, इसमें हमारी बुद्धिमत्ता से निर्णय लेना होता है। हम दुनिया के सर्वोत्तम सफल व्यक्तियों का इतिहास पढ़ेंगे, तो हमें पता चलेगा कि वो एक साधारण परिवार में जन्म लेकर दुनिया की उन ऊंचाइयों को हासिल किया है, अब वह स्वयं से अधिक दूसरों के लिए कार्य करते हैं क्योंकि उन्होंने आर्थिक आजादी को प्राप्त कर लिया है।
बड़ी अजीब होती है जिंदगी हमारी,
हर दिन कुछ नया करने का पैगाम लाती है, संघर्षों की धाराओं में बहते हुए,
जीवन को कुछ नया देकर जाती है जिंदगी हमारी,,
संघर्ष में नहीं घबराया वो इंसान अकेला बढ़ता है,
गिरना-उठना, हारना-जीतना, फिर उठ चलकर दौड़ लगाता है,,
उसके दर्द निकल जाते हैं हंसते-खेलते चेहरों पर,
क्योंकि बिन संघर्ष चमक नहीं आती,
जलता दीप चमकता है।
जब जीवन में संघर्ष आता है तब आत्म चिंतन की आवश्यकता पड़ती है आंतरिक शक्ति को जागृत करना होता है आत्मचिंतन से हर विकट परिस्थितियों का समाधान निकाला जा सकता है बहुत बार व्यक्ति असफल होने पर निराश हो जाता है लेकिन हमें सकारात्मकता रखते हुए यह सोचना चाहिए कि असफलता की चरम सीमाओं के बाद सफलता मिलती है
जिनकी मंजिल आसमां होती है,
वह रास्ता खुद बनाते हैं।
वो हर दिन अपने दिलों में,
उम्मीदों के दीप जलाते हैं,
अच्छी जिंदगी जीने के लिए,
हर तकलीफ सैनी होग़ा,
सिंढ़िया उन्हें ही मुबारक कर दो,
जिन्हें सिर्फ छत तक जाना होगा,
ऐसे ही एक सफलतम व्यक्ति की जीवनी बताता हूं,
जिनके 21 वर्ष की उम्र में व्यापार में घाटा आया,
22 की उम्र में चुनाव में हारे,
फिर व्यापार किया 24 की उम्र में फिर से बुरी तरह से व्यापार में नुकसान हुआ,
26 की उम्र में उनकी पत्नी का निधन हो गया,
और वे पूरी तरह टूट गए 27 कि उम्र तक पहुंचते पहुंचते अपनी मानसिक संतुलन खो बैठे
34 की उम्र में फिर चुनाव हार गए।
45 की उम्र में सीनेट का चुनाव हारे।
47 की उम्र में वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव हारे। 49 की उम्र में फिर से सीनेट का चुनाव हारे।
लेकिन जिद्दी थे ठान रखा था कि सफलता हासिल करके रहूंगा चाहे कुछ भी हो जाए और 52 की उम्र में अमेरिका के राष्ट्रपति बनके दिखाया,
जिनका नाम था अभिराम लिंकन।
जिन्होंने अपने जीवन में असफलता से हार मानना कभी स्वीकार नहीं किया आखिरकार एक दिन सफलता ने उनके चरण चूमे। तो हमें बिना थके, बिना रूके अपने मन से बिना टूटे,
निरंतर....निरंतर.....निरंतर.... आगे बढ़ना चाहिए।
जहां असफल हुए वहां निराश ना हो। हार, पीड़ा, संघर्ष, हानी इन सब की परवाह किए बिना सयंमता के साथ पुनः सफलतम प्रयास में लग जाना चाहिए।
एक बार एक बच्चे ने अपने बगीचे में किसी टहनी पर तितली का कोकुन लटकते देखा उसमें से तितली बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी पर नहीं निकल पा रही थी बहुत प्रयास के बाद भी वह उस छेद से बाहर नहीं निकल पाई और शांत हो गई मानो उसने अपने प्रयासों से हार मान ली हो जबकि ऐसा नहीं था इसी बीच उस बच्चे ने तितली की मदद करने का निश्चय किया उसने एक कैची उठाई
और उससे कोकुन के मुंह को मुंह को काटकर इतना बड़ा कर दिया कि वह तितली आसानी से बाहर निकल सके और हुआ यही कि तितली बिना किसी संघर्ष के बाहर निकल गई पर उसका पूरा शरीर सुझा हुआ था और पंख सूखे हुए हुए थे वह बच्चा तितली को लगातार देखकर सोच रहा था कि वह किसी भी वक्त अपने पंख फैलाकर उठने लगेगी। लेकिन हुआ इसके विपरीत वह तितली कभी नहीं उड़ पाई और अपने बाकी जिंदगी घिसटते हुए निकाली।
यदि उस तितली को अपने आप प्रयास करने दिया जाता जिससे वह पूर्ण रूप स्वस्थ बाहर निकलती, और सदैव अपने पंखों से उड़ती,
ठीक हमारा जीवन भी इसी तरह होता है की हम संघर्षों के बीच ही अनुभव पाकर अपनी सफलता को प्राप्त करें।
धन्यवाद।